अंतरिक्ष अब खाली नहीं रहा, बल्कि तेजी से भीड़भाड़ वाला होता जा रहा है। वर्ष 2025 में भारतीय उपग्रहों को 1.5 लाख से अधिक संभावित टकराव (Collision Alerts) के अलर्ट मिले, जिससे पृथ्वी की कक्षा में बढ़ते खतरे का संकेत मिला है।
भारतीय अंतरिक्ष स्थिति आकलन रिपोर्ट 2025 के अनुसार, दुनिया भर में करीब 1.6 लाख ऐसे अलर्ट दर्ज किए गए। इनमें से कई अलर्ट अमेरिकी स्पेस कमांड के कंबाइंड स्पेस ऑपरेशंस सेंटर द्वारा जारी किए गए, जो संभावित टकराव की स्थिति को दर्शाते हैं।
इन अलर्ट्स में वृद्धि का मुख्य कारण बड़े पैमाने पर हो रहे सैटेलाइट लॉन्च हैं। खासकर एक साथ सैकड़ों उपग्रह भेजने वाली मेगा कॉन्स्टेलेशन परियोजनाओं ने अंतरिक्ष की कक्षाओं को अत्यधिक भीड़भाड़ वाला बना दिया है। इससे टकराव से बचने के लिए प्रतिक्रिया समय भी बहुत कम हो गया है।
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को भी लगातार सतर्क रहना पड़ रहा है। वर्ष 2025 में इसरो ने 18 बार कक्षा परिवर्तन (Collision Avoidance Manoeuvres) किए। इनमें से 14 लो अर्थ ऑर्बिट और 4 जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में थे।
रिपोर्ट के अनुसार, 82 मिशन योजनाओं में बदलाव किया गया ताकि संभावित टकराव से बचा जा सके। यह दर्शाता है कि अब उपग्रहों की सामान्य गतिविधियों में भी बार-बार संशोधन जरूरी हो गया है।
चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर भी इससे अछूता नहीं रहा और उसे भी 16 बार कक्षा में बदलाव करना पड़ा।
2025 में कुल 315 सफल अंतरिक्ष प्रक्षेपण हुए, जिनसे 4,651 ऑब्जेक्ट्स कक्षा में भेजे गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही, तो अंतरिक्ष में सक्रिय उपग्रहों और मलबे का संतुलन और भी खतरनाक हो सकता है।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले समय में अंतरिक्ष प्रबंधन और निगरानी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी, वरना टकराव का खतरा गंभीर रूप ले सकता है।
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