श्रीलंका ने रविवार, 15 मार्च 2026 को ईंधन की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए क्यूआर कोड आधारित डिजिटल प्रणाली लागू कर दी है। सरकार ने इसे एहतियाती कदम बताया है, क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहा है।
श्रीलंका के ऊर्जा मंत्रालय ने एक सार्वजनिक सूचना जारी कर बताया कि मौजूदा हालात में देश में ईंधन की मांग असामान्य रूप से बढ़ गई है, जबकि उपलब्ध भंडार तेजी से कम हो रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, ऐसी स्थिति में देश की आर्थिक गतिविधियों को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए ईंधन के मौजूदा भंडार का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना जरूरी हो गया है।
नई प्रणाली के तहत वाहनों के लिए साप्ताहिक ईंधन कोटा तय किया गया है। कारों के लिए सप्ताह में अधिकतम 15 लीटर पेट्रोल या डीजल दिया जाएगा, जबकि मोटरसाइकिलों के लिए यह सीमा 5 लीटर तय की गई है। हर वाहन मालिक को एक क्यूआर कोड के माध्यम से ईंधन प्राप्त करना होगा, जिससे वितरण की निगरानी आसान होगी और अनावश्यक जमाखोरी को रोका जा सकेगा।
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सरकार का कहना है कि यह डिजिटल प्रणाली ईंधन वितरण को पारदर्शी और नियंत्रित बनाएगी। साथ ही इससे यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सभी उपभोक्ताओं को सीमित संसाधनों के बावजूद उचित मात्रा में ईंधन मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण कई देशों को ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सावधानी बरतनी पड़ रही है। ऐसे में श्रीलंका द्वारा उठाया गया यह कदम संभावित ईंधन संकट से निपटने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे नई प्रणाली का पालन करें और ईंधन का उपयोग सोच-समझकर करें, ताकि देश में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित न हों।
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