सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन मामले की जांच कर रही हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी को कई अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने पैलेट गन के कथित इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार, हिंसा, चोट और संपत्ति को हुए नुकसान की जांच को प्राथमिकता देने को कहा है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से कमेटी के गठन पर उठाई गई आपत्तियों के बावजूद एचपीईसी के पुनर्गठन से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के पक्षपाती होने की धारणा उसकी जांच शुरू होने से पहले नहीं बनाई जा सकती।
याचिकाकर्ताओं ने कमेटी की संरचना में बदलाव की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कमेटी ने अभी जांच शुरू भी नहीं की है, इसलिए उसके कामकाज पर पूर्वधारणा के आधार पर सवाल उठाना जल्दबाजी होगी। अदालत ने पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
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एचपीईसी को दोनों पक्षों से जुड़े हिंसा के मामलों और संपत्ति नुकसान की भी जांच करनी होगी। संवेदनशील और कमजोर गवाहों की पहचान गोपनीय रखने तथा उनके बयान और साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है। गवाहों के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने का सुझाव भी दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मोनिका गुसैन और एओआर सी. सोलोमन को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। उन्हें अदालत की सहायता के साथ स्वतंत्र मध्यस्थ की भूमिका निभाने को कहा गया है। कमेटी को जल्द सदस्य सचिव नियुक्त कर पहली रिपोर्ट भी जल्द सौंपने का निर्देश मिला है।
मामले में 14 वर्षीय प्रदर्शनकारी की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा। अदालत ने दिल्ली पुलिस को लड़की और उसके परिवार को मिली कथित धमकियों का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा देने तथा मामले की जांच करने को कहा है। अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।
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