सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की। अदालत ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच को जरूरी बताया।
समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। इसके अन्य सदस्यों में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक डॉ. एलआर बिश्नोई शामिल हैं।
किन आरोपों की होगी जांच?
समिति पुलिस की ओर से कथित रूप से पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की जांच करेगी। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, पुलिस निगरानी और भीड़ नियंत्रित करने के लिए अपनाए गए तरीकों की परिस्थितियों के अनुरूपता भी जांची जाएगी।
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अदालत ने चिकित्सा सहायता और पीड़ितों को मुआवजा देने से जुड़े पहलुओं को भी जांच के दायरे में रखा है। समिति यह भी देखेगी कि कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मी वर्दी और नाम-पट्टी पहने हुए थे या नहीं।
यह मामला शैलेंद्र मणि त्रिपाठी और अन्य की याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सुरक्षा बलों ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया।
हालांकि, सरकार और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करने तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन में कुछ आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग भी शामिल थे और हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समिति केवल प्रदर्शनकारियों की शिकायतों की जांच नहीं करेगी, बल्कि पुलिसकर्मियों पर हमले, संपत्ति के नुकसान और ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को लगी चोटों की भी जांच करेगी।
सबूत सुरक्षित रखने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस, अर्धसैनिक बलों और जांच एजेंसियों को सीसीटीवी, ड्रोन फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, वीडियो, वायरलेस लॉग और पीसीआर कॉल रिकॉर्ड समेत सभी संबंधित साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।
समिति जरूरत पड़ने पर फोरेंसिक और तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता ले सकेगी और अदालत को समय-समय पर रिपोर्ट सौंपेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को निर्धारित की है।
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