पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार कुरमी समुदाय के आंदोलन के दौरान पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार में दर्ज किए गए सभी मामलों को वापस लेने की दिशा में काम करेगी। उन्होंने यह घोषणा पुरुलिया जिले में आयोजित करम महोत्सव कार्यक्रम के दौरान की।
शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने कुरमी समुदाय के बीच विभाजन पैदा किया और समुदाय के हितों के लिए पर्याप्त काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार विधानसभा चुनाव से पहले ‘संकल्प पत्र’ में किए गए वादों को पूरा करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चालू बजट में कुरमी समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और आने वाले समय में इस राशि को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार कुर्माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए प्रयास करेगी। इसके अलावा, कुरमी विकास बोर्ड को जल्द दोबारा सक्रिय करने की बात भी कही गई।
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कुरमी समुदाय ने पश्चिम बंगाल के पश्चिमी जिलों में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन किए हैं। 2025 में पुरुलिया में समुदाय ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन किया था। इसी आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने की घोषणा अब मुख्यमंत्री ने की है।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव भी चर्चा में
पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जबकि रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई।
शुभेंदु अधिकारी ने हाल में दोनों सीटों के उपचुनाव को अल्पसंख्यक मतदाताओं के लिए “परीक्षा” बताया था और कहा था कि उन्हें तय करना है कि वे सरकार के साथ रहना चाहते हैं या नहीं। इन टिप्पणियों के बाद पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी धर्म के आधार पर मतदाताओं में भेद नहीं करती।
नंदीग्राम उपचुनाव में बीजेपी ने हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वह शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मां हैं।
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