योग गुरु स्वामी रामदेव ने पतंजलि के घी में मिलावट और कंपनी की कुछ दवाओं पर प्रतिबंध लगाए जाने की खबरों को खारिज किया है। बुधवार को नई दिल्ली में रामदेव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि की किसी दवा पर प्रतिबंध नहीं लगाया है।
रामदेव ने कहा कि पतंजलि की दवाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं और भारत या विदेश में किसी एजेंसी ने किसी दवा को निर्धारित मानकों से कम नहीं पाया है। उन्होंने घी में मिलावट के आरोपों को भी गलत बताते हुए कहा कि उत्पाद को किसी भी प्रयोगशाला में जांचा जा सकता है।
पतंजलि के उत्पादों पर लगाए आरोपों को नकारा
रामदेव ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में पतंजलि को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं और दावे फैलाए गए। इनमें घी में पशु वसा और यहां तक कि हड्डियों के इस्तेमाल के आरोप भी शामिल थे।
और पढ़ें: एशियन गेम्स में भारत को पुरुष टीम बैडमिंटन में कांस्य, चीन से 1-3 से हारा
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बयानों का जिक्र करते हुए रामदेव ने कहा कि उन्होंने सुनी-सुनाई बातों के आधार पर टिप्पणी की थी। रामदेव के अनुसार, बाद में उनकी बृजभूषण से मुलाकात हुई और उनकी गलतफहमियां दूर हो गईं। उन्होंने यह भी बताया कि पतंजलि ने उनके खिलाफ दायर मानहानि का मुकदमा वापस ले लिया है।
रामदेव ने ड्रग एंड रेमेडी एक्ट को पुराना कानून बताते हुए इसमें बदलाव की मांग की। उन्होंने कहा कि पतंजलि ने इस संबंध में प्रधानमंत्री के सामने भी अपनी मांग रखी है।
पांच लाख और रोजगार देने का दावा
रामदेव ने दावा किया कि पतंजलि ने करीब पांच लाख लोगों को रोजगार दिया है और आने वाले वर्षों में पांच लाख और रोजगार पैदा करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि पतंजलि ने योग और आयुर्वेद को विज्ञान के साथ जोड़कर भारतीय विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया है।
रामदेव ने विदेशी कंपनियों को चुनौती देने का दावा करते हुए कहा कि लोगों को दूसरों को नीचे खींचने के बजाय सभी को समान अधिकार देने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन और स्वास्थ्य मंत्रालय के सामने भी पतंजलि के स्वास्थ्य संबंधी दावों का उल्लेख किया।
और पढ़ें: एसआईआर विवाद पर बीजेपी का पलटवार, संबित पात्रा बोले- 2014 से सुचारू रूप से हो रहे चुनाव