तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कुछ सीमित लेकिन उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है। हालांकि, राज्य की राजनीति पर अब भी द्रविड़ पार्टियों का दबदबा कायम नजर आ रहा है।
मौजूदा रुझानों के अनुसार, बीजेपी के उम्मीदवार डॉ. नागेश कुमार सी 34,759 वोटों से आगे चल रहे हैं। वहीं, एक अन्य सीट पर बीजेपी के भोजराजन 189 वोटों से तमिऴगा वेट्री कज़गम (टीवीके) के उम्मीदवार इब्राहिम आर से आगे हैं।
इन शुरुआती बढ़तों से यह संकेत मिलता है कि बीजेपी तमिलनाडु में धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह अभी निर्णायक सफलता में नहीं बदली है। पार्टी के खाते में फिलहाल कुछ ही सीटें हैं, जिससे यह साफ है कि वह मुख्य दावेदारों से अभी काफी पीछे है।
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दूसरी ओर, क्षेत्रीय दलों का प्रभाव लगातार बना हुआ है। तमिऴगा वेट्री कज़गम (टीवीके) कई सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभर रही है। इसके अलावा, द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (एआईएडीएमके) के बीच मुकाबला अभी भी चुनाव का केंद्र बना हुआ है।
विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी की यह बढ़त व्यापक जनसमर्थन के बजाय चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित है। यह दर्शाता है कि पार्टी ने कुछ खास इलाकों में प्रभाव बढ़ाया है, लेकिन राज्य के पारंपरिक द्रविड़ राजनीतिक ढांचे को अभी चुनौती नहीं दे पाई है।
इतिहास में तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से क्षेत्रीय दलों के इर्द-गिर्द रही है, जहां राष्ट्रीय दलों की भूमिका सीमित रही है। 2026 के ये रुझान भी इसी परंपरा को दोहराते नजर आ रहे हैं।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगा कि बीजेपी ने द्रविड़ किले में बड़ी सेंध लगा दी है, लेकिन उसके छोटे-छोटे कदम भविष्य में बड़ी रणनीतिक भूमिका निभा सकते हैं।
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