आगामी चुनावों की तैयारी कर रहे चार राज्यों में तमिलनाडु वह राज्य है, जहां राजनीतिक हालात सबसे अधिक तरल और संभावनाओं से भरे हुए नजर आ रहे हैं। चुनाव में अब केवल कुछ ही महीने बचे हैं, लेकिन अभी भी कई संभावित राजनीतिक समीकरण और गठबंधन पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाए हैं।
सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) फिलहाल अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति में दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के नेतृत्व में पार्टी अपने संगठन और शासन के प्रदर्शन को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। वहीं, कांग्रेस पार्टी भीतरखाने असंतोष के बावजूद डीएमके गठबंधन में बनी हुई है और फिलहाल अलग राह अपनाने के संकेत नहीं दे रही है।
दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके अभी तक अपनी स्पष्ट चुनावी रणनीति को अंतिम रूप नहीं दे सका है। पार्टी के सामने यह बड़ा सवाल है कि वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ किस रूप में आगे बढ़े। एआईएडीएमके अपने विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है, क्योंकि उसे अपने पारंपरिक वोट आधार और गठबंधन की राजनीतिक लागत—दोनों को संतुलित करना है।
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बीजेपी तमिलनाडु में डीएमके के खिलाफ एक व्यापक मोर्चा खड़ा करने की कोशिश में जुटी हुई है। पार्टी का प्रयास है कि एआईएडीएमके और अन्य संभावित सहयोगियों को साथ लाकर एक मजबूत विरोधी गठबंधन तैयार किया जाए। इसी बीच अभिनेता से नेता बने विजय की राजनीतिक सक्रियता ने चुनावी समीकरणों को और रोचक बना दिया है। विजय की संभावित भूमिका यह तय कर सकती है कि युवा और शहरी मतदाता किस ओर रुख करते हैं।
कुल मिलाकर, तमिलनाडु की राजनीति इस समय कई चलती हुई गोटियों के बीच संतुलन तलाश रही है। आने वाले हफ्तों में गठबंधन, रणनीति और नेतृत्व को लेकर लिए जाने वाले फैसले चुनावी नतीजों पर निर्णायक असर डाल सकते हैं।
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