देशभर में क्षय रोग (टीबी) से प्रभावित लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन सर्वाइवर्स अगेंस्ट टीबी (SATB) ने टीबी की दवाओं और जांच सामग्री की निरंतर आपूर्ति को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। संगठन ने इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत टीबी के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं और डायग्नोस्टिक सामग्री की लगातार उपलब्धता बेहद जरूरी है। लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
पत्र में कहा गया है कि दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों में व्यवधान के कारण आवश्यक स्वास्थ्य सामग्री की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। ऐसे में टीबी मरीजों के इलाज में उपयोग होने वाली दवाओं और जांच सामग्री की उपलब्धता को लेकर स्पष्ट जानकारी जरूरी है।
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संगठन ने यह भी बताया कि दवा-प्रतिरोधी टीबी (ड्रग रेसिस्टेंट टीबी) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं सीमित संख्या में निर्माताओं द्वारा तैयार की जाती हैं। कई मामलों में इन दवाओं का उत्पादन वैश्विक साझेदारियों पर निर्भर करता है।
इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी प्रकार की आपूर्ति बाधा या व्यापारिक व्यवधान से इन दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो इससे मरीजों के इलाज में रुकावट आ सकती है और टीबी उन्मूलन के प्रयासों को भी झटका लग सकता है।
सर्वाइवर्स अगेंस्ट टीबी ने सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि दवाओं और जांच सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। संगठन का कहना है कि समय पर स्पष्ट जानकारी और मजबूत आपूर्ति व्यवस्था से मरीजों को इलाज में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
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