तमिलनाडु के थेनी जिला जेल से हाल ही में हुई जेलब्रेक की घटना के बाद राज्य सरकार ने जेल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य की जिला जेलों में बने वॉचटावरों पर तैनात सशस्त्र प्रहरियों को जरूरत पड़ने पर गोली चलाने का अधिकार दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु की सभी जेलों में वॉचटावर पहले से मौजूद हैं, लेकिन जनशक्ति की कमी या अन्य कारणों से इन वॉचटावरों पर अब तक सशस्त्र गार्डों की तैनाती नहीं की जाती थी। थेनी जिला जेल से हुई भगदड़ की घटना ने जेल प्रशासन की इस कमी को उजागर कर दिया, जिसके बाद अधिकारियों ने सुरक्षा में तत्काल बदलाव का निर्णय लिया।
इस घटना के बाद राज्य के जेल विभाग ने सभी जिला जेलों की सुरक्षा समीक्षा शुरू की। समीक्षा में यह बात सामने आई कि वॉचटावर होने के बावजूद वहां हथियारबंद प्रहरियों की अनुपस्थिति के कारण कैदियों की फरारी जैसी घटनाओं को रोकना मुश्किल हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब यह निर्णय लिया गया है कि जिला जेलों के वॉचटावरों पर तैनात गार्ड अब आवश्यकता पड़ने पर फायरिंग कर सकेंगे।
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यह कदम जेल सुरक्षा तंत्र को और सख्त बनाने की दिशा में उठाया गया है, ताकि भविष्य में थेनी जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। जेल प्रशासन का मानना है कि वॉचटावरों पर सशस्त्र गार्डों की तैनाती और उन्हें गोली चलाने का अधिकार देने से कैदियों के फरार होने के प्रयासों पर तत्काल अंकुश लगाया जा सकेगा।
हालांकि इस संबंध में जनशक्ति की पहले से मौजूद कमी को देखते हुए यह सवाल भी उठ रहा है कि सभी जेलों में पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित सशस्त्र गार्डों की तैनाती कैसे सुनिश्चित की जाएगी। जेल प्रशासन इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने की बात कह रहा है, जिसमें नई भर्तियां और मौजूदा स्टाफ के पुनर्गठन जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।
तमिलनाडु में जेल सुरक्षा से जुड़ी यह घटना पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है। थेनी जेल से हुई भगदड़ के बाद प्रशासन पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दबाव बढ़ गया था, जिसके परिणामस्वरूप यह नया निर्देश जारी किया गया है। आने वाले दिनों में राज्य की अन्य जेलों में भी इसी तरह की सुरक्षा समीक्षा किए जाने की संभावना जताई जा रही है, ताकि कैदियों के फरार होने की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
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