झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के तीन मौजूदा सदस्यों ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सीआईडी द्वारा पूछताछ के लिए तलब किए जाने के बाद अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। तीनों सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, जमील अहमद और अनीमा हांसदा ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेजा था। राज्य सरकार की सिफारिश के बाद राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए।
तीनों सदस्यों को 19 अप्रैल को आयोजित जेपीएससी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के संबंध में पूछताछ के लिए सीआईडी ने समन भेजा था। तीनों की नियुक्ति 2 सितंबर 2021 को हुई थी। अब सीआईडी परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और घटनाक्रम के बारे में उनसे जानकारी हासिल करेगी।
जेपीएससी परीक्षा रद्द करने को तैयार सरकार
इस बीच, झारखंड सरकार ने छात्रों के 16 दिन से जारी आंदोलन के बाद जेपीएससी परीक्षा रद्द करने पर सहमति जताई है। सूत्रों के अनुसार, सरकार कथित अनियमितताओं वाले बैकलॉग प्रश्नपत्रों की जांच के लिए सीआईडी और प्रवर्तन निदेशालय की जांच का आदेश देने को भी तैयार है। हालांकि छात्रों की मुख्य मांग सीबीआई जांच को लेकर अभी गतिरोध बना हुआ है।
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सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा अनियमितताओं के आरोपी बताए जा रहे अभय तिवारी द्वारा पिछले वर्षों में दी गई सभी परीक्षाओं को रद्द करने पर वह सहमत नहीं है। सरकार ने मुख्य छात्र संगठन को अपनी स्थिति से अवगत करा दिया है और कई मांगें स्वीकार की हैं। साथ ही, 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने की बात कही गई है।
छात्र सीबीआई जांच पर अड़े
छात्र नेताओं ने कहा है कि वे मामले में सीबीआई जांच चाहते हैं। उन्होंने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा तक मार्च करने की चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि सीबीआई जांच की घोषणा होने तक आंदोलन वापस लेने पर समझौता नहीं किया जाएगा।
वहीं मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार और छात्रों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने बताया कि जेपीएससी परीक्षा में वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय को सिफारिश भेजी जाएगी। परीक्षा से जुड़े मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालत गठित करने और 90 दिनों में आरोपपत्र दाखिल करने की भी बात कही गई है।
इस घटनाक्रम के बीच तीन जेपीएससी सदस्यों का इस्तीफा और परीक्षा रद्द करने की सरकार की तैयारी छात्रों के आंदोलन में महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। हालांकि सीबीआई जांच की मांग पर अंतिम सहमति अभी नहीं बन पाई है।
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