पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इसे अपनी बड़ी जीत करार दिया है। पार्टी ने दावा किया कि यह फैसला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए “करारा झटका” है।
टीएमसी नेताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से उन मतदाताओं को राहत मिली है, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। अदालत ने चुनाव आयोग (ईसीआई) को निर्देश दिया है कि ऐसे मतदाताओं के नाम पूरक संशोधित मतदाता सूची में शामिल किए जाएं, ताकि वे अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग कर सकें।
पार्टी ने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि इस फैसले से यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी पात्र मतदाता को उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सके। टीएमसी का आरोप है कि विपक्षी दल, खासकर बीजेपी, मतदाता सूची में बदलाव के जरिए चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे।
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टीएमसी नेताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि इस आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि कानून और संविधान के तहत हर नागरिक को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए।
वहीं, राजनीतिक माहौल में इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने टीएमसी के दावों पर सवाल उठाए हैं, जबकि टीएमसी इसे जनता के अधिकारों की रक्षा के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
कुल मिलाकर, यह फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।
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