पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में अंदरूनी राजनीतिक संकट और गहरा गया है। वरिष्ठ नेता और सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय शनिवार को बागी खेमे में शामिल हो गए और दिल्ली में केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचे। उनके साथ टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय भी मौजूद रहीं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब टीएमसी के भीतर बड़ा असंतोष देखा जा रहा है और 19 लोकसभा सांसदों के समर्थन का दावा करने वाला एक बागी समूह सक्रिय हो चुका है। यह गुट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने की तैयारी में है, जिसमें वे अपने अलग संसदीय गुट को मान्यता देने की मांग करेंगे और सदन में एनडीए के साथ बैठने की अनुमति भी चाहेंगे।
बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंप दिया है और सोमवार को औपचारिक रूप से अलग गुट बनाने का दावा पेश किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 8 जून से हस्ताक्षर अभियान शुरू हुआ था और 19 सांसदों ने दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं।
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हालांकि टीएमसी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि संविधान के 91वें संशोधन के बाद विभाजन का कोई प्रावधान नहीं बचा है और इस तरह का दावा कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
वहीं टीएमसी नेता कुणाल घोष ने मांग की है कि सोशल मीडिया पर घूम रहे हस्ताक्षरों की तुलना लोकसभा सचिवालय में उपलब्ध नमूना हस्ताक्षरों से की जाए ताकि उनकी प्रामाणिकता की जांच हो सके।
सूत्रों के अनुसार, बागी खेमे के कई सांसद दिल्ली पहुंच रहे हैं और आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। इस बीच भाजपा पर “ऑपरेशन लोटस” के जरिए तोड़फोड़ के आरोप भी लगाए जा रहे हैं, हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है।
टीएमसी के भीतर यह संकट हाल के वर्षों का सबसे बड़ा संगठनात्मक विवाद माना जा रहा है, जिसने पार्टी की राजनीतिक स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
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