पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी सियासी संघर्ष अब और तेज हो गया है। शुक्रवार को पार्टी के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कोलकाता के 30बी, हरिश चटर्जी स्ट्रीट स्थित टीएमसी मुख्यालय पर नियंत्रण का दावा किया। गुट के नेताओं ने कथित तौर पर कार्यालय में प्रवेश कर ताले बदल दिए, नए पोस्टर लगाए और बैठक आयोजित कर घोषणा की कि अब से पार्टी कार्यालय का संचालन वही करेंगे।
टीएमसी भवन पार्टी का केंद्रीय मुख्यालय है और इसका स्वामित्व कारोबारी मनोतोष साहा के पास है। ऋतब्रत बनर्जी के साथ फिरहाद हकीम, जावेद खान, संदीपन साहा और अखरुज्जमान भी मुख्यालय पहुंचे। इस दौरान ऋतब्रत ने कहा, "असली तृणमूल कांग्रेस हम हैं और यही हमारा मुख्यालय है।" उन्होंने घोषणा की कि उनका गुट शनिवार से इसी कार्यालय से पार्टी का कामकाज संचालित करेगा।
दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने इस कार्रवाई को अवैध करार दिया है। ममता गुट ने आरोप लगाया कि बागी नेताओं ने जबरन कार्यालय पर कब्जा किया है। इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराने और भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को पत्र भेजने का फैसला किया गया है।
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ममता समर्थक और टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी से निष्कासित नेताओं को मुख्यालय में प्रवेश करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह टीएमसी को नुकसान पहुंचाने की साजिश है। घोष ने यह भी कहा कि पुलिस को पहले ही सूचित किया गया था, लेकिन पुलिस ने कथित रूप से नए ताले लगाए जाने से नहीं रोका।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही निर्वाचन आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी और ममता गुट, दोनों को नोटिस जारी कर पार्टी पर दावे को लेकर सोमवार शाम तक जवाब मांगा है।
वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी। उनका दावा है कि उन्हें टीएमसी के 80 में से 64 विधायकों और 28 में से 20 लोकसभा सांसदों का समर्थन प्राप्त है, जिससे पार्टी में गहरा विभाजन पैदा हो गया है।
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