तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने कहा है कि राज्य में हिंदी के लिए न तो अतीत में कोई स्थान था, न वर्तमान में है और न ही भविष्य में कभी होगा। उन्होंने यह टिप्पणी रविवार (25 जनवरी 2026) को भाषा शहीद दिवस के अवसर पर की।
एक संदेश में मुख्यमंत्री स्टालिन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाषा के नाम पर अब और किसी भी व्यक्ति की जान नहीं जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि तमिल अस्मिता और भावना कभी समाप्त नहीं हो सकती और तमिल समाज हमेशा अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करता रहेगा।
स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु में हिंदी थोपे जाने का लगातार विरोध किया गया है और यह संघर्ष केवल भाषा का नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकारों का भी है। उन्होंने दोहराया कि तमिल लोगों की भावना और भाषा के प्रति लगाव अडिग है और इसे किसी भी तरह से कमजोर नहीं किया जा सकता।
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मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि तमिलनाडु ने अतीत में भाषा आंदोलन के दौरान कई बलिदान दिए हैं, लेकिन अब राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि आगे किसी को भी इस तरह के संघर्ष में अपनी जान न गंवानी पड़े। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीकों से हिंदी थोपने के प्रयासों का विरोध करते रहें।
स्टालिन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में भाषा को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो रही है। तमिलनाडु में लंबे समय से हिंदी थोपने का विरोध होता रहा है और राज्य सरकार बार-बार यह स्पष्ट करती रही है कि वह बहुभाषिक भारत की अवधारणा का समर्थन करती है, लेकिन किसी एक भाषा को थोपे जाने के खिलाफ है।
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