झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। धनबाद जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने एक करोड़ रुपये से अधिक के इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरफ्तारी वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि मिसिर बेसरा लंबे समय से प्रतिबंधित माओवादी संगठन के प्रमुख नेताओं में शामिल था और देश के सबसे वांछित उग्रवादियों में उसकी गिनती होती थी। उसकी गिरफ्तारी से झारखंड तथा आसपास के राज्यों में माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगने की उम्मीद है।
पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा बल लंबे समय से झारखंड और पड़ोसी राज्यों में माओवादियों के नेतृत्व और उनके नेटवर्क को कमजोर करने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। अब जांच एजेंसियां मिसिर बेसरा से पूछताछ कर संगठन की कार्यप्रणाली, नेतृत्व संरचना, सक्रिय सदस्यों और भविष्य की योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने का प्रयास करेंगी।
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यह कार्रवाई इसी वर्ष जनवरी में हुई एक बड़ी नक्सल विरोधी सफलता के बाद सामने आई है। उस समय सारंडा के जंगलों में मुठभेड़ के दौरान एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता अनल दा उर्फ तूफान को मार गिराया गया था। कोबरा बटालियन और सीआरपीएफ के संयुक्त अभियान में कुल आठ माओवादी ढेर किए गए थे, जिसे वर्ष के सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियानों में से एक माना गया था।
पुलिस के अनुसार, अनल दा, जिनका वास्तविक नाम पतिराम मांझी था और जो पतिराम मरांडी तथा रमेश के नाम से भी जाना जाता था, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य था और संगठन का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता था।
इस बीच रांची में मंगलवार को 16 माओवादियों ने झारखंड पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण भी किया। इनमें छह माओवादियों पर कुल 39 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस का मानना है कि इन लगातार सफल अभियानों से राज्य में माओवादी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
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