अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (29 जनवरी 2026) को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत कर रहा है और सैन्य विकल्प से बचने की संभावना अभी खुली हुई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब इससे पहले ट्रंप चेतावनी दे चुके थे कि तेहरान के लिए “समय खत्म होता जा रहा है” और अमेरिका ने क्षेत्र में एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा तैनात किया है।
रिपोर्टरों से बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि क्या वे ईरान के साथ बातचीत करेंगे, तो ट्रंप ने कहा, “मैं पहले भी बातचीत कर चुका हूं और आगे भी करने की योजना है।” अपनी पत्नी मेलानिया पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री के प्रीमियर के दौरान बात करते हुए उन्होंने कहा, “हमारी एक टीम ईरान नाम की जगह की ओर जा रही है और उम्मीद है कि हमें इसका इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा।”
इस बीच, ब्रसेल्स और वाशिंगटन के कड़े बयानों तथा ईरान की तीखी धमकियों के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने परमाणु वार्ता की अपील करते हुए कहा कि इससे “क्षेत्र में विनाशकारी परिणामों वाले संकट” से बचा जा सकता है।
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ईरान की ओर से ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरामिनिया ने चेतावनी दी कि किसी भी अमेरिकी कार्रवाई का जवाब सीमित नहीं होगा, बल्कि “तुरंत और निर्णायक” होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी विमानवाहक पोत कमजोर हैं और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य अड्डे ईरान की मध्यम दूरी की मिसाइलों की जद में हैं।
खाड़ी क्षेत्र के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिका के हमले की आशंका “बहुत स्पष्ट” है और ऐसा हुआ तो इससे पूरा क्षेत्र अराजकता में डूब सकता है, साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल-गैस की कीमतों पर भी गंभीर असर पड़ेगा।
इसी बीच, कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने तनाव कम करने और स्थिरता स्थापित करने के प्रयासों पर चर्चा की। उधर, यूरोपीय संघ ने हालिया प्रदर्शनों के दमन को लेकर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकवादी संगठन घोषित किया, जिस पर तेहरान ने कड़ी आपत्ति जताई है।
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