अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से जुड़े सामानों के आयात को रोकने के उद्देश्य से भारत समेत 17 देशों से आने वाले उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला किया है। यह कदम अमेरिकी व्यापार नीति के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य उन देशों पर दबाव बनाना है जहां जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर पर्याप्त रोक नहीं है।
ट्रंप ने जारी एक ज्ञापन में कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने उन्हें सलाह दी है कि इन देशों के सामानों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया जाए, ताकि वे जबरन श्रम से जुड़े आयात प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
गौरतलब है कि पिछले महीने अमेरिका ने ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत नए शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था। उस समय भारत को 12.5 प्रतिशत शुल्क वाले देशों की सूची में रखा गया था। हालांकि, नई दिल्ली द्वारा अपनी विदेश व्यापार नीति में बदलाव कर जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने के बाद वाशिंगटन ने भारत के कदम को ध्यान में रखा और शुल्क दर को 10 प्रतिशत कर दिया।
और पढ़ें: जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने पर विचार कर रही केंद्र सरकार, पेपर लीक कानून पर भी जल्द फैसला
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर ने गुरुवार को ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत 60 देशों पर नए शुल्क लगाने की घोषणा की। इनमें से 17 देशों पर 10 प्रतिशत और अन्य 43 देशों पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा।
10 प्रतिशत शुल्क वाले देशों में भारत, कनाडा, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत अन्य देश शामिल हैं। वहीं, जिन देशों में जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने वाले कानून नहीं हैं, उनमें चीन, ब्रिटेन और जापान जैसे देशों पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा।
हालांकि, अमेरिका ने कुछ श्रेणियों को इस शुल्क से छूट दी है। इनमें ऐसे कच्चे माल शामिल हैं जिनकी घरेलू आपूर्ति सीमित है, ऐसे उत्पाद जिनसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़ी बाधा आ सकती है और वे वस्तुएं जिन्हें अमेरिका में पर्याप्त मात्रा में उत्पादित नहीं किया जा सकता।
नए टैरिफ शुक्रवार रात 12:01 बजे से प्रभावी हो गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम मानवाधिकार उल्लंघनों को रोकने और वैश्विक श्रमिकों की स्थिति सुधारने के लिए उठाया गया है।
और पढ़ें: जंतर-मंतर प्रदर्शन: केंद्र से वार्ता से पहले सीजेपी करेगी प्रेस कॉन्फ्रेंस, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी