अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (2 फरवरी 2026) को दावा किया कि मेक्सिको क्यूबा को तेल की आपूर्ति बंद करने जा रहा है। क्यूबा पर दबाव बढ़ाने के अपने अभियान को तेज करते हुए ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, “मेक्सिको अब उन्हें तेल भेजना बंद कर देगा।” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें ऐसा क्यों लगता है।
इस बयान पर मेक्सिको के अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। गौरतलब है कि मेक्सिको क्यूबा को तेल की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा देश है। क्यूबा पहले से ही गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है, जहां अक्सर बिजली की भारी कटौती और बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट होते रहते हैं।
क्यूबा अपनी बिजली उत्पादन, पेट्रोल और विमान ईंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए आयातित रिफाइंड फ्यूल पर काफी हद तक निर्भर है। अमेरिकी प्रतिबंधों और लंबे समय से जारी गहरे आर्थिक संकट के कारण क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार वर्षों से पर्याप्त मात्रा में ईंधन खरीदने में असमर्थ रही है। इसी वजह से वह कुछ गिने-चुने सहयोगी देशों पर निर्भर हो गई है।
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रिपोर्ट के अनुसार, मेक्सिको सरकार इस बात की समीक्षा कर रही है कि क्यूबा को तेल आपूर्ति जारी रखी जाए या नहीं, क्योंकि उसे डर है कि ऐसा करने पर अमेरिका की ओर से जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम के प्रशासन ने रविवार (1 फरवरी 2026) को कहा था कि वह “मानवीय आधार” पर क्यूबा को तेल भेजने की कोशिश करेगा और किसी तरह के टकराव से बचना चाहता है। हालांकि, यह भी कहा गया कि आने वाले सप्ताह में सहायता अन्य उत्पादों के रूप में हो सकती है।
पिछले महीने हवाना और वाशिंगटन के बीच तनाव तब और बढ़ गया था, जब अमेरिका ने वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया था, जो क्यूबा के करीबी सहयोगी माने जाते हैं। ट्रंप ने क्यूबा को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए “असामान्य और असाधारण खतरा” बताया है और चेतावनी दी है कि जो भी देश क्यूबा को तेल भेजेगा, उसके अमेरिकी निर्यात पर टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
मेक्सिको और क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अगर क्यूबा को ऊर्जा आपूर्ति नहीं मिली, तो वहां गंभीर मानवीय संकट पैदा हो सकता है।
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