अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सदस्य देशों और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका ने दशकों तक अपने सहयोगियों की सुरक्षा की, लेकिन ईरान के परमाणु खतरे के मुद्दे पर उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि नाटो के कई सदस्य देश और विशेष रूप से इटली, ईरान के बढ़ते परमाणु खतरे के खिलाफ अमेरिका के साथ खड़े होने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने नाटो देशों की सुरक्षा पर खरबों डॉलर खर्च किए हैं, लेकिन जब अमेरिका और दुनिया को सहयोग की आवश्यकता है, तब उसके सहयोगी पीछे हट रहे हैं।
ट्रंप ने कहा, “नाटो, इटली और उसकी प्रधानमंत्री पर खरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी वे ईरान के गंभीर परमाणु खतरे के खिलाफ शामिल होने के बारे में सोचने तक को तैयार नहीं हैं। दशकों तक हमने उनकी रक्षा की, लेकिन जब हमारी बारी आई तो वे हमारे साथ नहीं खड़े हुए। यह अच्छी बात नहीं है।”
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ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व शांति प्रस्ताव को लागू करने के लिए वार्ता जारी है। इस बीच फ्रांस में आयोजित 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद ट्रंप और जॉर्जिया मेलोनी के बीच विवाद और गहरा गया है।
जी-7 सम्मेलन के कुछ दिन बाद ट्रंप ने दावा किया कि मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए आग्रह किया था। उन्होंने इटली की विदेश नीति की भी आलोचना की। इसके जवाब में मेलोनी ने ट्रंप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी लोकप्रियता ट्रंप से दोस्ती की वजह से नहीं, बल्कि इटली के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की क्षमता के कारण है।
मेलोनी ने कहा कि ट्रंप के लगातार और बेवजह किए गए हमले निरर्थक हैं और वह हमेशा इटली के हितों की रक्षा करती रहेंगी।
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