यूजीसी की इक्विटी रेगुलेशंस को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने मोदी सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की यह आदत बन चुकी है कि वह किसी से भी परामर्श नहीं करती और यही रवैया उसके हर फैसले में साफ दिखाई देता है। यह बयान उन्होंने शनिवार (31 जनवरी 2026) को दिया।
हालांकि, पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रह चुके कपिल सिब्बल ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए इस पर कोई प्रत्यक्ष राय देना उनके लिए उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय में विचाराधीन विषय पर टिप्पणी करना संवैधानिक रूप से सही नहीं है।
एक साक्षात्कार में कपिल सिब्बल ने कहा, “यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए मुझे इस पर कोई राय देने से बचना चाहिए। लेकिन व्यापक दृष्टिकोण से देखें तो इस देश में हर वर्ग को साथ लेकर चलना जरूरी है।” उन्होंने जोर दिया कि भारत तभी एक महान राष्ट्र बन सकता है जब नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन दोनों स्तरों पर समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखा जाए।
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उन्होंने ‘विकसित भारत’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि समाज के किसी भी हिस्से को नजरअंदाज किया गया या उनके बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश की गई, तो इसका सीधा नुकसान देश के भविष्य को होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह बयान केवल यूजीसी के नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक सोच को दर्शाता है।
कपिल सिब्बल ने कहा कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है। यहां अलग-अलग समुदाय, जातियां, क्षेत्र और भाषाएं हैं और इस विविधता को कमजोरी नहीं बल्कि एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम सबसे पहले भारतीय हैं, उसके बाद किसी समुदाय, जाति, क्षेत्र या भाषा से जुड़ते हैं। सरकार को इसी भावना के साथ फैसले लेने चाहिए ताकि हर वर्ग की चिंताओं को सम्मान और स्थान मिल सके।
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