मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) आनंद मालवीय को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उस आदेश के बाद की गई, जिसमें उन्होंने राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की विवादित ‘घंटा’ टिप्पणी का उल्लेख करते हुए उसे “तानाशाही व्यवहार का प्रतीक” बताया था। यह टिप्पणी इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले के बाद सामने आई थी।
एसडीएम आनंद मालवीय ने इंदौर जल प्रदूषण मामले को लेकर कांग्रेस द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के मद्देनज़र उज्जैन जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक आदेश जारी किया था। इसी आदेश में उन्होंने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान का संदर्भ देते हुए कड़ी टिप्पणी की थी, जिसे सरकार ने अनुचित और मर्यादा के खिलाफ माना।
इंदौर में दूषित पानी के कारण कई लोगों की मौत के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया था। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए प्रदर्शन शुरू किए थे। इसी दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक बयान चर्चा में आया था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर विरोध को लेकर ‘घंटा’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इस बयान की आलोचना विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने की थी।
और पढ़ें: इंदौर में दूषित पानी से मौतों का आंकड़ा 10 पहुंचा, एक अधिकारी बर्खास्त, दो निलंबित; जांच समिति गठित
एसडीएम द्वारा अपने आधिकारिक आदेश में इस बयान को “अधिनायकवादी सोच का प्रतीक” बताना सरकार को नागवार गुजरा। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, एक अधिकारी द्वारा राजनीतिक नेतृत्व पर इस तरह की टिप्पणी करना सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन माना गया। इसके बाद राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से एसडीएम आनंद मालवीय को निलंबित करने का फैसला लिया।
इस निलंबन के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कुछ लोगों का कहना है कि अधिकारियों को निष्पक्ष रहते हुए केवल कानून-व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए, जबकि अन्य इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं।
और पढ़ें: क्रिसमस से पहले मध्य प्रदेश में चर्चों में घुसपैठ, दक्षिणपंथी संगठनों की कार्रवाई से तनाव बढ़ा