संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में ईरान-इजरायल युद्ध के बीच नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक नया मसौदा प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर होने वाले सभी हमलों की कड़ी निंदा की गई है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
मंगलवार शाम को अंतिम रूप दिए गए इस मसौदा प्रस्ताव में तुरंत कूटनीति और वार्ता के जरिए तनाव कम करने की अपील की गई है। हालांकि इसमें सीधे तौर पर ईरान, अमेरिका या इजरायल का नाम नहीं लिया गया है। उम्मीद है कि आज इस प्रस्ताव पर मतदान कराया जा सकता है। इससे पहले खाड़ी देश अपना अलग प्रस्ताव पेश करेंगे, जिसमें ईरान से अरब देशों पर हमले रोकने की मांग की जाएगी।
इस बीच, लेबनान में एक बचाव अभियान के दौरान हुए इजरायली हमले में रेड क्रॉस के एक सदस्य की मौत हो गई। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब टीम पहले हुए हमले के बाद घायलों को बचाने का प्रयास कर रही थी। हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच 2 मार्च को शुरू हुए संघर्ष के बाद यह पहली बार है जब रेड क्रॉस के किसी कार्यकर्ता की मौत हुई है।
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युद्ध के दौरान ईरान द्वारा इस्तेमाल की जा रही मिसाइलों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि ईरान की खोर्रामशाहर और जोल्फाघर मिसाइलें कई वारहेड ले जाने में सक्षम हैं। ये मिसाइलें ऊंचाई पर फटकर बड़े इलाके में छोटे-छोटे विस्फोटक गिराती हैं, जिन्हें क्लस्टर हथियार कहा जाता है।
इजरायल के अधिकारियों का कहना है कि ये क्लस्टर हथियार वायु रक्षा प्रणाली के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। कई छोटे विस्फोटक जमीन पर बिना फटे रह जाते हैं, जो बाद में लैंडमाइन की तरह खतरनाक साबित होते हैं।
इसी दौरान बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में भी हमलों की चेतावनी दी गई है। बहरीन की राजधानी मनामा में एक आवासीय इमारत पर हमले में 29 वर्षीय महिला की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए। वहीं यूएई ने भी ईरानी हमलों को रोकने के लिए अपनी वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी है।
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