उत्तर प्रदेश सरकार की गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में नोएडा के लिए मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन के गठन का मुद्दा चर्चा में रहा। प्रस्तावित मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन से प्रशासन में अधिक पारदर्शिता, नागरिकों की भागीदारी में वृद्धि और शहरी सेवाओं में सुधार सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो नोएडा के शासन और प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित नोएडा की स्थापना करीब 50 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 के तहत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य औद्योगिक, आवासीय और वाणिज्यिक विकास को एक सुव्यवस्थित और योजनाबद्ध तरीके से बढ़ावा देना था। इस अधिनियम के जरिए क्षेत्र में सुनियोजित औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षित करने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया था।
नोएडा को एक एकीकृत टाउनशिप के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई थी, जहां नागरिक सुविधाएं और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा उपलब्ध हो। समय के साथ नोएडा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का एक प्रमुख औद्योगिक और आवासीय केंद्र बन गया है।
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वर्तमान में नोएडा का प्रशासन न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (NOIDA) के अधीन है। इसके दैनिक कार्यों का संचालन एक नियुक्त आईएएस अधिकारी द्वारा मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के रूप में किया जाता है। नोएडा प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में कुल 81 राजस्व गांव आते हैं और यह लगभग 20,316 हेक्टेयर भूमि में फैला हुआ है।
कैबिनेट बैठक में मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन के गठन पर चर्चा को नोएडा के शहरी प्रशासन को अधिक लोकतांत्रिक और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे स्थानीय निवासियों की भागीदारी बढ़ने और शहरी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होने की संभावना है।
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