उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीट बंटवारे की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी से 200 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग की है। पार्टी की कोशिश है कि सीट बंटवारे से जुड़ी बातचीत 15 नवंबर तक पूरी हो जाए, ताकि उम्मीदवारों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने सीटों की पहचान 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन के आधार पर की है। उस चुनाव में पार्टी ने उत्तर प्रदेश की छह लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस ने विधानसभा क्षेत्रों में अपने प्रदर्शन को देखते हुए सीटों को A, B, C और D श्रेणियों में बांटा है। पार्टी उन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दे रही है, जहां उसे अपेक्षाकृत बेहतर समर्थन मिला था।
कांग्रेस का मानना है कि देशभर में चलाए गए ‘संगठन सृजन अभियान’ से उसका संगठन मजबूत हुआ है। इसी आधार पर पार्टी ने 200 से अधिक विधानसभा सीटों पर अपना दावा पेश किया है।
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प्रियंका गांधी वाड्रा संभाल रहीं रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे की प्रक्रिया पर नजर रख रही हैं। वह केरल की वायनाड लोकसभा सीट से सांसद हैं। इससे पहले उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इमरान मसूद सहित अन्य नेताओं के साथ बैठकें कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की थी।
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस जल्द ही समाजवादी पार्टी के साथ सीट बंटवारे पर बातचीत करने के लिए एक विशेष टीम गठित कर सकती है।
क्या सपा 200 से ज्यादा सीटें देगी?
कांग्रेस की मांग के बावजूद समाजवादी पार्टी द्वारा उसे इतनी बड़ी संख्या में सीटें दिए जाने की संभावना कम मानी जा रही है। सपा के नेता संकेत दे चुके हैं कि गठबंधन में पार्टी खुद अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाह सकती है। हालांकि, दोनों दलों ने विपक्षी इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात कही है।
सपा नेता रामाशंकर राजभर ने कहा कि कांग्रेस और सपा साथ चुनाव लड़ेंगी तथा सीट बंटवारे का मामला तय हो चुका है। उन्होंने कहा कि सीटों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण चुनाव जीतना है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी या मार्च में होने की संभावना है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सीटों का अंतिम समझौता गठबंधन की चुनावी रणनीति के लिए अहम होगा।
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