उत्तर प्रदेश में स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी को लेकर जेन अल्फा छात्रों के विरोध का सिलसिला जारी है। इस बीच राज्य के शिक्षा विभाग ने करीब 40 हजार प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के लिए 14 सूत्रीय चेकलिस्ट जारी की है। हालांकि, विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम को छात्रों की समस्याओं का वास्तविक समाधान करने के बजाय महज दिखावा बताया है।
शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को विपक्षी नेताओं ने कहा कि छात्रों की मांगों को पूरा करने के लिए मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और पूरी प्रणाली में बदलाव जरूरी है। विपक्ष का आरोप है कि स्कूलों में बुनियादी ढांचे, पर्याप्त शिक्षकों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है।
कांग्रेस ने चेकलिस्ट जारी करने के फैसले को सरकार की नीतिगत विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। पार्टी के मुताबिक, राज्य में स्कूलों के बंद होने और शिक्षा के गिरते स्तर जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केवल चेकलिस्ट तैयार करने से शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और गाजीपुर से लोकसभा सांसद अफजाल अंसारी ने भी भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चेकलिस्ट जारी करने की कोशिश व्यवस्था की विफलताओं को छिपाने के बराबर है। उनका आरोप है कि भाजपा सरकार ने कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के कारण उत्तर प्रदेश और देश की शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है।
विपक्ष का कहना है कि छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के लिए स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, बेहतर भवन, जरूरी संसाधन और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही बंद हो रहे स्कूलों और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
जेन अल्फा छात्रों के विरोध और विपक्ष के दबाव के बीच अब सरकार के सामने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू करने की चुनौती है।
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