अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए सोमवार (13 अप्रैल) से उसके सभी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी शुरू करने की घोषणा की है। यह निर्णय उस समय लिया गया जब दोनों देशों के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई लंबी शांति वार्ता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि यह नाकेबंदी ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर “निष्पक्ष रूप से” लागू की जाएगी। इसमें अरब सागर और ओमान की खाड़ी से जुड़े बंदरगाह भी शामिल हैं। हालांकि, सेंटकॉम ने स्पष्ट किया कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही बाधित नहीं की जाएगी।
सेंटकॉम के अनुसार, 13 अप्रैल को भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से यह कार्रवाई लागू होगी। सभी समुद्री जहाजों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें और आवश्यक होने पर अमेरिकी नौसेना से संपर्क करें।
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इससे पहले, इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच करीब 21 घंटे तक चली वार्ता विफल हो गई थी। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया, जिन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपनी “अंतिम और सर्वोत्तम” पेशकश दी थी और ईरान से परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी मांगी थी।
ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि वार्ता अमेरिका की “अतार्किक मांगों” के कारण विफल हुई। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात कही।
इस घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ा है। अमेरिकी तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि ब्रेंट क्रूड में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और प्रभावित हो सकती है।
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