मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे पर आयोग की आपत्ति
अमेरिका के एक धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को लेकर चिंता जताई है। आयोग ने अमेरिकी सरकार से आरएसएस के सदस्यों और कथित तौर पर धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघनों में शामिल भारतीय अधिकारियों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों पर विचार करने की अपील की है।
अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने कहा कि अमेरिकी सरकार को आरएसएस से जुड़े लोगों और ऐसे भारतीय अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए, जो उनके अनुसार धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघनों में सहभागी रहे हैं।
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महमूद ने विशेष रूप से मोहन भागवत को जारी किए गए अमेरिकी वीजा को रद्द करने की मांग भी की। आयोग ने आरएसएस को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का वैचारिक मूल संगठन बताते हुए संगठन की गतिविधियों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है।
मोहन भागवत फिलहाल अमेरिका के दौरे पर हैं। वह न्यूयॉर्क शहर में 29 अगस्त 2026, शनिवार को आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में संबोधित करने वाले हैं। उनके कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े इस आयोग की टिप्पणी के बाद विवाद बढ़ गया है।
आयोग का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ लक्षित कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आयोग द्वारा सुझाए गए संभावित प्रतिबंधों के तहत किन-किन व्यक्तियों या अधिकारियों को शामिल किया जाएगा।
मोहन भागवत के दौरे के बीच सामने आए इस बयान से भारत और अमेरिका के बीच धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर पहले से मौजूद बहस फिर चर्चा में आ गई है। आरएसएस और भारतीय अधिकारियों की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
भागवत का न्यूयॉर्क कार्यक्रम शनिवार को होना प्रस्तावित है और अब इस दौरे पर अमेरिकी आयोग की टिप्पणी के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें टिक गई हैं।
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