अमेरिका के 25 डेमोक्रेटिक शासित राज्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत सहित 59 देशों पर लगाए गए नए वैश्विक टैरिफ के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है। राज्यों का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना अवैध रूप से नए आयात शुल्क लगाकर परिवारों और कारोबारियों पर अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश की है।
इससे पहले न्यूयॉर्क स्थित कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड की तीन सदस्यीय पीठ ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ को अवैध करार दे चुकी थी। अदालत ने कहा था कि राष्ट्रपति ने कांग्रेस द्वारा दिए गए अधिकारों से आगे बढ़कर यह फैसला लिया।
मुकदमा दायर करने वाले राज्यों में एरिज़ोना, कैलिफ़ोर्निया, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, इलिनॉय, केंटकी, मेन, मैरीलैंड, मैसाचुसेट्स, मिशिगन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू जर्सी, न्यू मैक्सिको, न्यूयॉर्क, नॉर्थ कैरोलाइना, ओरेगन, पेनसिल्वेनिया, रोड आइलैंड, वर्मोंट, वर्जीनिया, वॉशिंगटन और विस्कॉन्सिन शामिल हैं।
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ट्रंप प्रशासन ने कथित रूप से जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों पर रोक लगाने के उद्देश्य से यह नई टैरिफ व्यवस्था लागू की है। जिन देशों में ऐसे उत्पादों के खिलाफ कानूनी प्रावधान कमजोर हैं, जैसे चीन और जापान, उन पर 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। वहीं भारत, श्रीलंका और यूरोपीय संघ जैसे देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लागू किया गया है क्योंकि इन देशों ने जबरन श्रम से जुड़े आयात पर नियंत्रण के लिए कदम उठाए हैं।
भारत को कम टैरिफ मिलने के पीछे वाणिज्य मंत्रालय द्वारा 14 जून को विदेशी व्यापार नीति में किया गया संशोधन अहम माना जा रहा है। इसके अलावा भारत ने अमेरिका के साथ लगातार कूटनीतिक वार्ता भी जारी रखी। इसका लाभ भारतीय निर्यातकों को मिला और वस्त्र, दवा, इंजीनियरिंग उत्पाद तथा ऑटो कंपोनेंट जैसे क्षेत्रों को प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत की तुलना में 10 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। इससे भारतीय निर्यात उद्योग को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
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