उत्तराखंड सरकार ने अग्निवीरों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए देश का पहला ‘अग्निवीर रोजगार प्रकोष्ठ’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार, 25 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में यह प्रस्ताव मंजूर किया गया। इस प्रकोष्ठ का उद्देश्य सेना में चार साल की सेवा पूरी करने के बाद लौटने वाले अग्निवीरों को रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करना है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड ऐसा प्रकोष्ठ स्थापित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने इसे देश की सेवा करने वाले युवाओं के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और जिम्मेदारी की भावना बताया। रोजगार प्रकोष्ठ अग्निवीरों को उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप रोजगार के अवसरों की जानकारी देगा। साथ ही विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों में उपलब्ध नौकरियों तथा योजनाओं के बारे में मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता भी प्रदान करेगा।
शहीद सैनिकों के गांवों में लगेंगी प्रतिमाएं
कैबिनेट ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इससे शहीदों की कुर्बानी को हमेशा याद रखा जा सकेगा और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरणा मिलेगी।
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कौन होते हैं अग्निवीर?
अग्निवीरों की भर्ती केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के तहत थलसेना, नौसेना और वायुसेना में होती है। इनकी सेवा अवधि चार वर्ष होती है, जिसमें करीब छह महीने का प्रशिक्षण शामिल है। कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रदर्शन, अनुशासन और सेना की जरूरत के आधार पर अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेवा में बनाए रखा जाता है। बाकी 75 प्रतिशत को सम्मानपूर्वक सेवा से मुक्त किया जाता है और उन्हें विभिन्न सरकारी तथा निजी रोजगार अवसरों के लिए आगे बढ़ने का मौका मिलता है।
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