उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने तथा साझेदारी के नए क्षेत्रों की पहचान करने पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध सदियों पुराने हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को प्राचीन व्यापार मार्गों और लोगों के बीच मजबूत संपर्कों ने लंबे समय से जोड़े रखा है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि विदेश मंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, संपर्क और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को नई गति प्रदान करेगी।
उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री 2 अगस्त को चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना है। अपने कार्यक्रम के तहत वह नई दिल्ली में आयोजित होने वाले एक बिजनेस फोरम में भाग लेंगे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे।
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भारत और उज्बेकिस्तान के बीच राजनयिक संबंध मार्च 1992 में स्थापित हुए थे। वर्ष 2011 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया। इसके बाद से रक्षा, व्यापार, शिक्षा, ऊर्जा, संपर्क और निवेश जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है।
दोनों देशों के बीच निवेश को बढ़ावा देने के लिए सितंबर 2024 में द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जो मई 2025 से प्रभावी हुई। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव की पिछली मुलाकात सितंबर 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025 में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। दोनों देशों का मानना है कि व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्र में अभी भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। ऐसे में विदेश मंत्री सईदोव की यह यात्रा आपसी संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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