द्रविड़ आंदोलन के वरिष्ठ विचारक और तमिल राजनीति की एक अहम शख्सियत एल. गणेशन का रविवार तड़के (4 जनवरी 2026) निधन हो गया। 91 वर्षीय गणेशन ने तंजावुर के मेडिकल कॉलेज रोड स्थित राम नगर में अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और वर्ष 2006 से परिवार के सदस्यों के साथ रह रहे थे।
एल. गणेशन ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में कई अहम भूमिकाएं निभाईं। वह विधान परिषद (एमएलसी), विधान सभा (एमएलए) के सदस्य रहे और इसके अलावा लोकसभा तथा राज्यसभा सांसद के रूप में भी उन्होंने देश की संसद में तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व किया। राजनीति के साथ-साथ वह एक प्रखर वक्ता और विचारक के रूप में भी जाने जाते थे।
24 अप्रैल 1934 को तंजावुर जिले के ओरथानाडु तालुक स्थित कन्नथनकुडी गांव में जन्मे गणेशन छात्र जीवन से ही सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों से जुड़ गए थे। कानून की पढ़ाई के दौरान वह तमिल भाषा आंदोलन से गहराई से प्रभावित हुए। इसी प्रेरणा के चलते उन्होंने सी.एन. अन्नादुरई द्वारा स्थापित द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) का दामन थामा।
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1960 के दशक में उन्होंने हिंदी थोपे जाने के खिलाफ चले आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। आपातकाल के दौरान उन्हें कठोर ‘मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट’ (मीसा) के तहत हिरासत में भी लिया गया था। यह दौर उनके राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण और संघर्षपूर्ण अध्याय माना जाता है।
एल. गणेशन को द्रविड़ विचारधारा, सामाजिक न्याय और तमिल अस्मिता के प्रबल समर्थक के रूप में याद किया जाता है। उनके निधन से तमिलनाडु की राजनीति और द्रविड़ आंदोलन को गहरा आघात लगा है। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।
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