दिल्ली में मेट्रो स्टेशन के नामकरण को लेकर एक बार फिर विवाद शुरू हो गया है। विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) के इन्द्रप्रस्थ प्रांत अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार गुप्ता ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को पत्र लिखकर इंड्रप्रस्थ–इंदरलोक कॉरिडोर पर प्रस्तावित ‘नबी करीम’ स्टेशन का नाम बदलकर ‘रामनगर’ करने की मांग की है।
गुप्ता ने पत्र में कहा कि मेट्रो स्टेशन केवल प्रशासनिक चिह्न नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि नामकरण में स्थानीय ऐतिहासिक दस्तावेज़, नगर निगम के रिकॉर्ड और जनता की स्वीकृति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि यात्रियों के लिए स्पष्टता और सुविधा बनी रहे।
पत्र में कहा गया है कि स्थानीय निवासी और व्यापारियों में ‘नबी करीम’ नाम को लेकर असंतोष है, क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से आधिकारिक और व्यावहारिक रूप से ‘रामनगर’ के नाम से जाना जाता है। एमसीडी, निवासीय पते और ऐतिहासिक दस्तावेज़ ‘रामनगर’ को इस इलाके की प्रमुख पहचान मानते हैं।
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गुप्ता ने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय पहचान को नजरअंदाज किया गया, तो भविष्य में नाम बदलने को लेकर और विवाद पैदा हो सकता है, जिससे DMRC पर वित्तीय बोझ और प्रशासनिक जटिलताएँ बढ़ेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि पहले हुए नाम बदलने के मामलों में लगभग 45 लाख रुपये सार्वजनिक धन खर्च हुए थे।
वीएचपी ने मेट्रो अधिकारियों से अपील की कि प्रारंभिक चरण में ही पारदर्शी और तथ्य-आधारित निर्णय लिया जाए, ताकि भविष्य में विवाद और सार्वजनिक धन की हानि से बचा जा सके।
इस विवाद ने दिल्ली मेट्रो परियोजना के नामकरण नीति और स्थानीय संवेदनशीलताओं पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को फिर से उजागर कर दिया है।
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