महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में एक सीमांत किसान द्वारा बनाए गए वायरल वीडियो ने पुलिस को एक बड़े और अंतरराष्ट्रीय किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट तक पहुंचा दिया। यह वीडियो पिछले महीने एक अवैध साहूकार के खिलाफ बनाया गया था, लेकिन इसकी जांच के दौरान पुलिस को अंग तस्करी से जुड़े एक संगठित नेटवर्क के सुराग मिले।
पुलिस के अनुसार, इस अवैध रैकेट में दो डॉक्टर शामिल थे और इसके तार न केवल महाराष्ट्र बल्कि देश के कई अन्य राज्यों और यहां तक कि कंबोडिया तक जुड़े हुए थे। जांच में सामने आया है कि राज्य के गरीब और बेरोजगार युवाओं को पैसों का लालच देकर अपनी किडनी बेचने के लिए मजबूर किया गया। इन युवाओं को एक किडनी के बदले ₹5 लाख से ₹8 लाख तक की राशि दी जाती थी, जबकि वास्तविक लाभ बिचौलिये और नेटवर्क से जुड़े लोग कमाते थे।
चंद्रपुर पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वायरल वीडियो में किसान ने साहूकार द्वारा किए जा रहे शोषण का जिक्र किया था। जब पुलिस ने इस मामले की तह तक जाने की कोशिश की, तो उन्हें संदिग्ध लेन-देन, मेडिकल दस्तावेजों और कुछ डॉक्टरों की भूमिका पर शक हुआ। इसके बाद की गई तकनीकी और वित्तीय जांच में अंग प्रत्यारोपण रैकेट का खुलासा हुआ।
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जांच एजेंसियों का कहना है कि यह रैकेट गरीब तबके के लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें अवैध और खतरनाक सर्जरी के लिए तैयार करता था। कई मामलों में उचित चिकित्सा देखभाल के बिना ऑपरेशन किए जाने की आशंका भी जताई गई है।
महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में कई लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि यह मामला मानव तस्करी और संगठित अपराध से भी जुड़ा हो सकता है, जिसकी गहन जांच की जा रही है।
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