पूर्व उत्तराखंड मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भारत द्वारा इसे संभालने के प्रयास का चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों पर "मानसिक प्रभाव" पड़ेगा।
हरीश रावत ने कहा कि विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संघर्ष की परिस्थितियाँ चुनावी मानसिकता और मतदाताओं के निर्णयों को प्रभावित करती हैं। उनका कहना था कि विशेषकर विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे मतदाता की सोच पर असर डाल सकते हैं, जो आने वाले चुनावों में पार्टियों के पक्ष या विपक्ष में मतदान के रूप में प्रकट होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सरकार द्वारा संकट के प्रबंधन के तरीके और इसकी छवि भी जनता की धारणा को प्रभावित करेगी। पश्चिम एशिया संकट जैसे वैश्विक घटनाक्रम का चुनावी रणभूमि पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।
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हरीश रावत ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस इन परिस्थितियों को समझते हुए जनता के बीच संवाद और भरोसे का निर्माण करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चुनाव में सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय स्थिति जैसे मुद्दे मतदाता की प्राथमिकता बन सकते हैं।
पूर्व सीएम ने कहा, "जब वैश्विक संकट की स्थिति होती है, तो जनता केवल स्थानीय मुद्दों पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखकर अपने निर्णय देती है। पश्चिम एशिया का संकट निश्चित रूप से चुनावी मानसिकता पर प्रभाव डालेगा।"
उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन चुनौतियों का सामना करने और जनता को समझाने के लिए पूरी तरह तैयार है, ताकि मतदाता सही और संतुलित निर्णय ले सकें।
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