पश्चिम बंगाल की सबसे बड़ी सांस्कृतिक पहचान दुर्गा पूजा अब केवल कुछ दिनों का उत्सव नहीं रहेगी, बल्कि सालभर लोगों को आकर्षित करने वाला एक स्थायी सांस्कृतिक केंद्र बनने जा रही है। कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में एक भव्य वास्तुशिल्प परियोजना आकार ले रही है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा “दुर्गांगन” (Durgaanagan) बताया जा रहा है। यह परियोजना 17.28 एकड़ में फैली होगी और इसका उद्देश्य दुर्गा पूजा को यूनेस्को द्वारा ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ के रूप में दिए गए सम्मान को स्थायी श्रद्धांजलि देना है।
262 करोड़ रुपये की इस परियोजना को हिडको (HIDCO) द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है। परिसर की सबसे बड़ी विशेषता इसका 177 फुट ऊंचा गर्भगृह होगा, जो इसे एक अद्वितीय पहचान देगा। इस दुर्गांगन में 108 देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी, साथ ही 64 भव्य सिंह प्रतिमाएं और लगभग 1,000 स्तंभ पूरे परिसर को भव्यता प्रदान करेंगे।
अब तक दुर्गा पूजा की परंपरा अस्थायी पंडालों तक सीमित रही है, जो हर साल उत्सव के बाद हटा दिए जाते हैं। लेकिन यह स्थायी संरचना बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को एक नई दिशा देगी। यहां न केवल दुर्गा पूजा के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे, बल्कि पूरे वर्ष पर्यटक, श्रद्धालु और शोधकर्ता भी आकर्षित होंगे।
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परियोजना के तहत पारंपरिक बंगाली वास्तुकला और आधुनिक डिजाइन का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। इससे न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। माना जा रहा है कि यह दुर्गांगन भविष्य में पश्चिम बंगाल के प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों में शामिल होगा और दुर्गा पूजा की भावना को सालभर जीवंत रखेगा।
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