असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका तेजी से बढ़ती दिख रही है। हालिया घटनाक्रम और पार्टी के फैसलों से संकेत मिलते हैं कि कांग्रेस उन्हें पूर्वोत्तर की राजनीति में एक अहम जिम्मेदारी सौंप रही है। पहली बार कांग्रेस ने गांधी परिवार के किसी सदस्य को किसी राज्य की उम्मीदवार स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है और यह जिम्मेदारी प्रियंका गांधी को दी गई है।
प्रियंका गांधी अब असम में कांग्रेस की ओर से विधानसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के चयन की प्रमुख जिम्मेदार होंगी। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा असम में मजबूत स्थिति में है और कांग्रेस को कड़ी चुनौती मिल रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस निर्णय के पीछे गठबंधन राजनीति एक बड़ा कारण है। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई युवा नेता हैं और लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता भी हैं। उनके पिता तरुण गोगोई लंबे समय तक असम के मुख्यमंत्री रहे और गांधी परिवार के करीबी थे। गौरव गोगोई, सचिन पायलट और जीतू पटवारी को कांग्रेस की नई पीढ़ी के नेताओं के रूप में देखा जाता है।
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हालांकि, असम में भाजपा के मजबूत किले को भेदने के लिए गौरव गोगोई को एक बड़े राजनीतिक सहारे की जरूरत है, जो प्रियंका गांधी की मौजूदगी से मिल सकता है। आंकड़े बताते हैं कि असम में चुनाव मुख्यतः गठबंधनों के बीच लड़े जाते हैं। पिछली बार एनडीए को 126 में से 75 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस नीत महाजोत को 50 सीटें। वोट प्रतिशत में अंतर महज 1.6 प्रतिशत था।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि विपक्षी गठबंधन मजबूत उम्मीदवार उतारने में सफल होता है तो भाजपा को चुनौती दी जा सकती है। प्रियंका गांधी के नेतृत्व में टिकट वितरण में पारदर्शिता आएगी और nepotism जैसे आरोपों से बचा जा सकेगा। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, यह भूमिका पार्टी में प्रियंका गांधी के भविष्य में और बड़े कद की ओर इशारा करती है।
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