संसद के विशेष सत्र में शुक्रवार को एक बार फिर भारी हंगामा देखने को मिला, जब महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े तीन विधेयक अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं कर सके और पारित होने की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हुई।
विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व में, सरकार पर आरोप लगाता रहा कि परिसीमन की प्रक्रिया के माध्यम से देश के राजनीतिक नक्शे को बदला जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि इससे “उत्तर-दक्षिण विभाजन” गहरा हो सकता है और दक्षिण व पूर्वोत्तर राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। हालांकि विपक्ष ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए इसके क्रियान्वयन के तरीके पर आपत्ति जताई।
सरकार की ओर से कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में कहा कि लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर 815 की जाएगी, जिसमें 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सरकार के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने विपक्ष पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसका राजनीतिक मूल्य उन्हें चुकाना पड़ेगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी आश्वासन दिया कि परिसीमन से किसी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी, बल्कि दक्षिण भारत के राज्यों की सीटें बढ़ेंगी।
हालांकि विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बनाता रहा। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सवाल उठाया कि मौजूदा 543 सीटों पर 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों लागू नहीं किया जा रहा। वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए भी आरक्षण की मांग की।
इस मुद्दे पर सदन में तीखी बहस जारी रही और राजनीतिक टकराव और गहराता नजर आया।
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