दुनिया के सबसे छोटे द्वीपीय देशों में शामिल नाउरू ने अपनी पहचान और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के उद्देश्य से अपना आधिकारिक नाम बदलने का फैसला किया है। अब यह देश रिपब्लिक ऑफ नाओएरो (Republic of Naoero) के नाम से जाना जाएगा। नए नाम का उच्चारण "नाओ-एरो" किया जाएगा।
प्रशांत महासागर में स्थित इस छोटे से देश की आबादी लगभग 12 हजार है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि देश की स्वदेशी पहचान, पूर्वजों की विरासत और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नाओएरो सरकार के अनुसार, यह फैसला औपनिवेशिक प्रभाव से बाहर निकलने और अपनी मूल भाषा तथा संस्कृति को संरक्षित करने के प्रयासों का हिस्सा है। देश के राष्ट्रपति डेविड एडेआंग ने कहा कि नाम में बदलाव "पहचान, विरासत और हमारे पूर्वजों की विरासत को सुरक्षित रखने तथा बच्चों के भविष्य को मजबूत करने" से जुड़ा हुआ है।
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सरकार ने बताया कि अब देश के नागरिकों को भी नाउरूअन के बजाय देई-नाओएरो (dei-Naoero) के नाम से संबोधित किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भी आधिकारिक रूप से नाम परिवर्तन की सूचना दे दी है।
नाउरू सरकार ने संसद में इस बदलाव से जुड़ा विधेयक इस साल जनवरी में पेश किया था। सरकार का कहना है कि "नाउरू" नाम मूल रूप से सुविधा के कारण प्रचलन में आया था, क्योंकि विदेशी भाषाओं में नाओएरो शब्द का सही उच्चारण करना मुश्किल था।
देश का यह कदम दुनिया भर में चल रहे उन प्रयासों से जुड़ा है, जिनके तहत कई राष्ट्र अपने औपनिवेशिक इतिहास से जुड़े नामों को बदलकर अपनी स्थानीय संस्कृति और भाषा को प्राथमिकता दे रहे हैं। नाओएरो सरकार को उम्मीद है कि यह बदलाव राष्ट्रीय गौरव को बढ़ाएगा और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में मदद करेगा।
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