भारत और चीन के रिश्ते लंबे समय से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। कभी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा तो कभी सीमा विवादों ने तनाव पैदा किया। अब गलवान झड़प के बाद पहली बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना बन रही है। भारत ने उन्हें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आधिकारिक निमंत्रण भेजा है।
सूत्रों के अनुसार, शी जिनपिंग सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले सकते हैं। यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को भारत की अध्यक्षता में आयोजित किया जाएगा। चीन ने भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस सम्मेलन का समर्थन किया है। हालांकि, शी जिनपिंग की यात्रा को लेकर अभी अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
गलवान विवाद के बाद पहली यात्रा
अगर शी जिनपिंग भारत आते हैं तो यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जाएगा, क्योंकि गलवान घाटी में जून 2020 में हुई हिंसक झड़प और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लंबे समय तक चले सैन्य तनाव के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी।
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इससे पहले शी जिनपिंग अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। उन्होंने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दूसरी अनौपचारिक बैठक में हिस्सा लिया था। इससे पहले दोनों नेताओं के बीच 2018 में चीन के वुहान में पहली अनौपचारिक वार्ता हुई थी।
हालांकि, 2019 के महाबलीपुरम दौरे के कुछ महीनों बाद लद्दाख क्षेत्र में सीमा विवाद बढ़ गया और दोनों देशों के संबंधों में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा तनाव देखने को मिला।
2014 में भी आए थे भारत
शी जिनपिंग सितंबर 2014 में पहली बार राष्ट्रपति के रूप में भारत आए थे। उस दौरान उन्होंने अहमदाबाद और नई दिल्ली का दौरा किया था। इसके बाद से वह कई बहुपक्षीय मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलते रहे हैं, लेकिन भारत की यात्रा नहीं की।
पीएम मोदी भी गए थे चीन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त-सितंबर 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। यह लगभग सात साल बाद उनकी चीन यात्रा थी।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी 2018 में वुहान अनौपचारिक सम्मेलन और 2019 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीन गए थे।
रूस में हुई थी दोनों नेताओं की मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच आखिरी द्विपक्षीय बैठक अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान में हुई थी। यह बैठक एलएसी विवाद को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच बनी सहमति के बाद हुई थी। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच एससीओ सम्मेलन के दौरान भी बातचीत हुई थी।
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