आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने केंद्र सरकार के परिसीमन (डीलिमिटेशन) और संवैधानिक संशोधन विधेयक का समर्थन करने का फैसला किया है। इस फैसले से संसद में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की स्थिति और मजबूत होने की संभावना है।
एनडीए को इन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है। वाईएसआरसीपी के समर्थन से सरकार को अतिरिक्त संख्या बल मिलेगा, क्योंकि पार्टी के पास लोकसभा में चार और राज्यसभा में सात सांसद हैं।
वाईएसआरसीपी के महासचिव सज्जला रामकृष्ण रेड्डी ने कहा कि उनकी पार्टी जनसंख्या आधारित परिसीमन के बजाय लोकसभा सीटों में समान 50 प्रतिशत वृद्धि का समर्थन करती है। उनके अनुसार, यदि किसी राज्य में 40 सीटें हैं तो 20 और जोड़ी जाएं, जिससे संतुलन बना रहे और दक्षिणी राज्यों की चिंताओं का समाधान हो सके।
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हालांकि, कांग्रेस ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया कि जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के हितों से समझौता किया है और यह कदम केंद्र सरकार के साथ राजनीतिक तालमेल का हिस्सा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह निर्णय कानूनी मामलों से राहत पाने की कोशिश हो सकती है।
विपक्ष का कहना है कि परिसीमन से दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार का दावा है कि किसी भी राज्य की राजनीतिक ताकत कम नहीं होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने आश्वासन दिया है कि परिसीमन संतुलित तरीके से किया जाएगा।
अब लोकसभा में इस महत्वपूर्ण विधेयक पर शुक्रवार को मतदान होना है, जो देश की राजनीतिक दिशा के लिए अहम माना जा रहा है।
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