2022 में बदलाव के नाम पर सत्ता में आई आम आदमी पार्टी (AAP) अब पंजाब में अपने चुनावी वादों को पूरा करने के दबाव में है। सरकार ने कई मुफ्त योजनाओं का वादा किया था, लेकिन इनमें से कुछ ही पहले साल लागू हो पाईं, जबकि कई बड़े वादों को कार्यकाल के अंतिम वर्ष तक टाल दिया गया।
पहले साल लागू हुई योजनाओं में हर घर को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा प्रमुख हैं। इन योजनाओं से लोगों को राहत मिली, लेकिन राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी पड़ा।
संसाधनों की कमी के कारण सरकार ने मुख्यमंत्री मावां-धीआं सतकार योजना के तहत महिलाओं को 1,000 से 1,500 रुपये देने, मेरी रसोई योजना, 10 लाख श्रमिकों के लिए मुफ्त पंजीकरण, पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड पर्सोनल एक्ट और मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 10 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य कवर जैसे वादों को कार्यकाल के आखिरी साल के लिए टाल दिया।
और पढ़ें: पंजाब के स्कूलों पर कांग्रेस की टिप्पणी के बाद AAP का हिमाचल को जवाब, मनीष सिसोदिया ने दी साझा ऑडिट की चुनौती
नशीले पदार्थों से मुक्त पंजाब, 25 लाख नौकरियां, हर फसल पर MSP और किसानों को कर्जमुक्त करने जैसे वादे भी विपक्ष के निशाने पर हैं। सरकार करीब 65 हजार सरकारी नौकरियों और 5.5 लाख रोजगार अवसरों का दावा करती है, लेकिन विपक्ष इसे वादे से काफी कम बताता है।
शिरोमणि अकाली दल ने AAP सरकार पर मुफ्त योजनाओं के नाम पर पंजाब का खजाना लूटने का आरोप लगाया। सुखबीर बादल ने कहा कि सरकार ने चार वर्षों में विज्ञापनों पर 4,500 करोड़ रुपये खर्च किए और विकास को नजरअंदाज किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए उसे ‘कट्टर बेईमान पार्टी’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कर्ज लेकर राज्य चला रही है और बजट का बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में जा रहा है।
पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि AAP सरकार एक साल में 50,000 करोड़ रुपये तक नया कर्ज लेने की योजना बना रही है। उनके मुताबिक राज्य का कर्ज 4.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि उनकी सरकार ने चार वर्षों में जनता से किए सभी वादे पूरे किए हैं। उनका कहना है कि पारदर्शिता और युवाओं को रोजगार देना सरकार की बड़ी उपलब्धियां हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, चुनावी साल में मुफ्त बिजली, महिलाओं को आर्थिक सहायता, मुफ्त बस यात्रा और कैशलेस इलाज जैसी योजनाएं AAP के वोट बैंक को मजबूत कर सकती हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सब्सिडी से पूंजीगत खर्च प्रभावित हो सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में कमजोर प्रदर्शन चुनाव में सरकार के लिए चुनौती बन सकता है।
और पढ़ें: राघव चड्ढा ने पंजाब सरकार पर साधा निशाना, 18 सितंबर से नशा मुक्त पंजाब यात्रा का ऐलान