दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली कांग्रेस नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन की रैली के जवाब में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भी राजधानी में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। पार्टी करीब 5,000 लोगों के साथ मार्च निकालने की योजना बना रही है। इसमें 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित और उनके परिवार के सदस्य भी शामिल होंगे।
यह मार्च रविवार, 1 नवंबर को सुबह 11 बजे दिल्ली के हरि नगर इलाके में आयोजित किया जाएगा। इसकी अगुवाई केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी करेंगे। बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता और पार्टी के प्रमुख सिख नेता भी इसमें हिस्सा ले सकते हैं। पार्टी इस कार्यक्रम के जरिए 1984 की हिंसा के मुद्दे को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाना चाहती है।
1984 दंगा पीड़ित और उनके परिवार होंगे शामिल
मार्च की प्रमुख विशेषता 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों और उनके परिजनों की भागीदारी होगी। बीजेपी का यह कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है, जब विपक्षी गठबंधन ने भी दिल्ली में बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी की है।
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रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली
उधर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर शुक्रवार को विपक्षी दलों के नेताओं ने बैठक कर 1 नवंबर की रैली की तैयारियों पर चर्चा की। ‘चलो दिल्ली रामलीला मार्च’ के नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जाएगी। विपक्ष विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। दक्षिण भारत सहित कई राज्यों के विपक्षी दलों ने रैली को समर्थन दिया है। कई मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
चिराग पासवान ने रैली की तारीख पर उठाए सवाल
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने रैली के समय पर आपत्ति जताई। पटना में उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान दिल्ली में प्रदर्शन से व्यापारियों और आम लोगों को परेशानी हो सकती है। उनके मुताबिक, दशहरा और दिवाली के बीच बाजारों में खरीदारी का महत्वपूर्ण समय होता है।
पासवान ने 1 नवंबर की तारीख पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इसी दिन 1984 में दिल्ली में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा हुई थी। ऐसे दिन रैली आयोजित करना पीड़ित परिवारों की भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पंजाब चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन के लिए इस तारीख को चुना गया है।
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