मेघालय की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) के नौ विधायक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। अगर यह राजनीतिक बदलाव होता है, तो 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में बीजेपी की ताकत दहाई के आंकड़े में पहुंच जाएगी।
यूडीपी और बीजेपी दोनों ही नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा हैं। फिलहाल बीजेपी के पास विधानसभा में सिर्फ दो विधायक हैं, जबकि यूडीपी के 12 विधायक हैं। ऐसे में नौ विधायकों के संभावित पाला बदलने से राज्य के राजनीतिक समीकरण में बड़ा बदलाव आ सकता है।
इस घटनाक्रम के बीच यूडीपी विधायकों की केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित शाह से हालिया मुलाकात ने भी अटकलों को हवा दी है। यूडीपी ने कहा था कि बैठक में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) और मेघालय से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के बीच इस मुलाकात को व्यापक राजनीतिक महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है।
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सूत्रों के अनुसार, संभावित विलय की स्थिति में बीजेपी के लिए अधिक मंत्री पद की मांग भी चर्चा का हिस्सा हो सकती है। इससे सत्तारूढ़ गठबंधन में सत्ता के बंटवारे का समीकरण बदलने और बीजेपी की सौदेबाजी की ताकत बढ़ने की संभावना है।
यूडीपी के भीतर भी असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। कई विधायक पार्टी अध्यक्ष मेतबाह लिंगदोह से कथित तौर पर नाराज बताए जा रहे हैं। उन्हें मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा का करीबी माना जाता है। हाल में केंद्रीय कार्यकारी समिति की बैठक में भी कुछ विधायकों ने नेतृत्व के प्रति नाराजगी जताई। तीखी बहस के बाद कुछ विधायकों के बैठक से बाहर निकलने की बात भी सामने आई।
अगर कम से कम आठ विधायक यूडीपी छोड़ते हैं, तो वे दल-बदल विरोधी कानून के तहत दो-तिहाई की सीमा पूरी कर सकते हैं। इससे संभावित विलय को कानूनी सुरक्षा मिल सकती है और मेघालय में बीजेपी की अब तक की सबसे मजबूत विधानसभा उपस्थिति बन सकती है।
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