महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति में इन दिनों शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संभावित विलय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिशें तेज हो सकती हैं।
हालांकि अभी तक दोनों दलों के बीच किसी औपचारिक विलय प्रस्ताव या बातचीत की पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी हाल के दिनों में राजनीतिक गलियारों में इस संभावना को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने हाल ही में कहा कि देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और संविधान के सामने खड़ी चुनौतियों को देखते हुए धर्मनिरपेक्ष विचारधारा वाले दलों को एकजुट होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे दलों के कांग्रेस में शामिल होने की सोच मजबूत हो रही है।
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नाना पटोले के बयान का समर्थन संजय राउत ने भी किया। शिवसेना (यूबीटी) नेता राउत ने कहा कि कांग्रेस छोड़कर बने दलों को एक बार फिर कांग्रेस के साथ आने पर विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, भाजपा का मुकाबला करने के लिए विपक्षी एकता जरूरी है।
हालांकि, एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने इन अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि न तो कांग्रेस की ओर से कोई प्रस्ताव आया है और न ही उनकी पार्टी ने ऐसा कोई प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने कहा कि शरद पवार समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी ऐसी किसी पहल की जानकारी नहीं है।
उधर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने एनसीपी (एसपी) को कांग्रेस के बजाय एनडीए में शामिल होने की सलाह दी है।
गौरतलब है कि 1999 में शरद पवार, पी.ए. संगमा और तारिक अनवर द्वारा कांग्रेस से अलग होकर एनसीपी का गठन किया गया था। अब संभावित विलय की चर्चाओं ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
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