राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव के लिए वोटों की गिनती सोमवार, 14 सितंबर से शुरू हो गई है। राज्य की 309 शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव परिणाम आज सामने आने की उम्मीद है। इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच महत्वपूर्ण राजनीतिक मुकाबला माना जा रहा है।
इन चुनावों में कुल 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिकाएं शामिल हैं। कुल 10,245 पार्षद सीटों के लिए करीब 1.44 करोड़ मतदाता मतदान के पात्र थे। मतदान दो चरणों में हुआ। पहले चरण में 9 सितंबर को 162 निकायों में मतदान हुआ, जबकि दूसरे चरण में 11 सितंबर को 147 निकायों में वोट डाले गए।
पहले चरण में 76.41 प्रतिशत और दूसरे चरण में 71.69 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। दोनों चरणों को मिलाकर कुल मतदान प्रतिशत 74.05 रहा। 309 निकायों के 10,167 वार्डों में हुए चुनाव में कुल 38,889 उम्मीदवारों की राजनीतिक किस्मत का फैसला होगा। मतदान के लिए राज्यभर में 16,465 केंद्र बनाए गए थे।
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इन चुनावों में महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए सीटें आरक्षित की गई थीं। महापौर और सभापति पदों का आरक्षण लॉटरी के माध्यम से तय किया गया है। पार्षदों के परिणाम आने के बाद 21 सितंबर को महापौर और सभापति के चुनाव होंगे। वहीं, 22 सितंबर को उपमहापौर, उपसभापति और उपाध्यक्ष पदों के लिए चुनाव कराया जाएगा।
10 नगर निगमों में जयपुर में 150, जोधपुर और कोटा में 100-100, अजमेर, उदयपुर और बीकानेर में 80-80, भीलवाड़ा में 70 तथा अलवर, पाली और भरतपुर में 65-65 वार्ड हैं।
इन परिणामों से राजस्थान के शहरी निकायों में सत्ता का संतुलन तय होगा और आगामी महापौर, सभापति तथा अन्य प्रमुख पदों के चुनाव की दिशा भी स्पष्ट होगी।
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