तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने वन मंत्री कोंडा सुरेखा को तत्काल प्रभाव से मंत्रिमंडल से हटा दिया है। कांग्रेस की अनुशासन समिति ने अगस्त में ही उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की सिफारिश की थी। यह सिफारिश उनकी बेटी कोंडा सुष्मिता की ओर से मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद की गई थी।
कोंडा सुरेखा तेलंगाना सरकार में वन मंत्री के पद पर जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अब मुख्यमंत्री के फैसले के बाद उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया है। इस कार्रवाई को कांग्रेस के भीतर अनुशासन और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सार्वजनिक बयानों को लेकर सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
मामला कोंडा सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता की उन टिप्पणियों से जुड़ा है, जिन्हें मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ अपमानजनक माना गया था। इसके बाद कांग्रेस की अनुशासन समिति ने मामले का संज्ञान लिया और अगस्त में कोंडा सुरेखा को मंत्रिमंडल से हटाने की सिफारिश की थी।
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जी. चिन्ना रेड्डी पर भी कार्रवाई
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एक अन्य कार्रवाई में कांग्रेस नेता जी. चिन्ना रेड्डी को तेलंगाना योजना आयोग के उपाध्यक्ष पद से भी हटा दिया है। चिन्ना रेड्डी पर भी मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अनुचित टिप्पणियां करने का आरोप लगा था।
कोंडा सुरेखा और जी. चिन्ना रेड्डी के खिलाफ हुई कार्रवाई से संकेत मिलता है कि तेलंगाना कांग्रेस नेतृत्व पार्टी और सरकार के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक रूप से की जाने वाली कथित अनुशासनहीन टिप्पणियों को गंभीरता से ले रहा है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से किए गए इन फैसलों के बाद तेलंगाना की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। कोंडा सुरेखा को मंत्रिमंडल से हटाने का फैसला तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। वहीं, जी. चिन्ना रेड्डी को योजना आयोग के उपाध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद संगठन और सरकार के बीच अनुशासन को लेकर कांग्रेस का रुख स्पष्ट हुआ है।
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