ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अब्दुलरहीम मौसवी की अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए हवाई हमलों में मौत हो गई। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने 1 मार्च (रविवार) को इसकी पुष्टि की। मौसवी को वर्ष 2025 में आयतुल्ला अली ख़ामेनेई द्वारा इस अहम पद पर नियुक्त किया गया था, जब उनके पूर्ववर्ती मोहम्मद बाघेरी की हत्या कर दी गई थी। उन्हें “कठिन मिशनों का आदमी” कहा जाता था।
अब्दुलरहीम मौसवी एक अनुभवी सैन्य अधिकारी थे, जिन्होंने दशकों तक ईरानी सेना में सेवा दी। उन्होंने सेना के उत्तर-पूर्वी मुख्यालय की कमान संभाली, कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया और इमाम अली सैन्य विश्वविद्यालय का संचालन किया। वर्ष 2017 में वे सेना प्रमुख बने और जून 2025 में सशस्त्र बलों के सर्वोच्च चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किए गए।
बताया जा रहा है कि हालिया हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाया गया। इनमें अली शमखानी और मोहम्मद पाकपोर जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। इन हमलों को ईरान की सैन्य संरचना को कमजोर करने की बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
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इससे पहले शनिवार को हुए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी/लायन सरोअर’ के दौरान आयतुल्ला अली ख़ामेनेई की भी मौत की पुष्टि हुई थी। तेहरान सहित 24 प्रांतों में हुए हमलों में 200 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है।
ईरान ने इन मौतों को “शहादत” करार देते हुए 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। वहीं, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कड़े प्रतिशोध की चेतावनी दी है। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक बाजारों में हलचल है, तेल की कीमतों में तेजी आई है और कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है।
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