भोपाल में हजारों किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी किसान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आवास का घेराव करने के उद्देश्य से राजधानी की ओर मार्च कर रहे हैं। इस दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कई स्थानों पर पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने की भी कोशिश की। ओबेदुल्लागंज क्षेत्र के पास पुलिस और किसानों के बीच तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली।
किसानों की सबसे प्रमुख मांग मूंग की फसल की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर शत-प्रतिशत सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की है। इसके अलावा वे ई-टोकन व्यवस्था को समाप्त करने तथा भूमि अभिलेखों के आधार पर किसानों को खाद उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पटेल ने कहा कि जब तक सरकार उनकी सभी मांगें नहीं मानती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था के कारण किसानों को अपनी उपज उचित मूल्य पर बेचने में कठिनाई हो रही है।
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संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान सोमवार देर शाम सीहोर जिले के बुधनी पहुंचे और मंगलवार को वहां से पैदल भोपाल के लिए रवाना हुए। प्रदर्शनकारियों के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भोजन और पानी की व्यवस्था भी की गई है ताकि आंदोलन लंबे समय तक जारी रखा जा सके।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया है। होशंगाबाद रोड स्थित वीर सावरकर ब्रिज के पास किसानों को रोकने के लिए बड़ी संख्या में बैरिकेड्स लगाए गए हैं। अन्य जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है।
इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मूंग खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश, जो देश का सबसे बड़ा मूंग उत्पादक राज्य है, वहां निर्धारित खरीद लक्ष्य का बहुत कम हिस्सा ही खरीदा गया है, जिससे किसानों को मजबूरन कम कीमत पर अपनी फसल बेचनी पड़ रही है।
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