मुंबई के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षण और गैर-शिक्षण स्टाफ के 57 प्रतिशत पद रिक्त हैं, जबकि माध्यमिक स्कूलों में यह संख्या 33 प्रतिशत है। यह जानकारी मुंबई में नगरपालिका शिक्षा की स्थिति 2026 रिपोर्ट में सामने आई।
रिपोर्ट में छात्रों के प्रतिधारण को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। 2015-16 में कक्षा 1 में दाखिला लेने वाले 100 छात्रों में से केवल 48 छात्र 2024-25 तक कक्षा 10 में बने रहे। लगभग 18 प्रतिशत छात्रों की स्थिति अस्पष्ट या रिकॉर्ड में नहीं थी, जिससे छात्रों के ट्रैकिंग सिस्टम में कमजोरी स्पष्ट होती है।
हालांकि, बीएमसी स्कूलों में नामांकन में हल्का बढ़ोतरी देखने को मिली है। 2015-16 में 41 प्रतिशत नामांकन था, जो 2024-25 में बढ़कर 44 प्रतिशत हो गया।
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रिपोर्ट के अनुसार, नागरिक शिक्षा बजट 2015-16 में ₹2,374 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में ₹4,105 करोड़ हो गया है। प्रति छात्र खर्च भी ₹61,894 से बढ़कर ₹1.32 लाख हो गया है।
इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि जबकि बजट और प्रति छात्र निवेश में वृद्धि हुई है, स्टाफ की भारी कमी और छात्रों के प्रतिधारण की समस्या शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता और निरंतरता पर गंभीर प्रभाव डाल रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बीएमसी को शिक्षकों और गैर-शिक्षक स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को तेज करना होगा और छात्र ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत बनाना होगा, ताकि छात्र शिक्षा प्रणाली में बने रहें और स्कूलों की कार्यकुशलता बढ़ सके।
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